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वेद और स्वामी दयानन्द

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लेखक: गाजी महमूद धरमपाल

लेखक का परिचय: इनका पहला नाम मास्टर अब्दुल गफूर था. ये गुजरांवाला के हाई स्कूल के हेडमास्टर थे. १९०३ में स्वामी दयानन्द सरस्वती की किताबों से और आर्यसमाज के शुद्दी आन्दोलन से प्रभावित होकर इस्लाम को छोड़ दिया और वैदिक धर्म अपना लिया जिस पर समाजियों ने बड़ी खुशियाँ मनायीं. उन्हों ने अपना नाम धरमपाल रखा. धरमपाल ने इस्लाम के खिलाफ आर्यसमाज की सहायता से कई किताबें लिखी. आप को उन सभी किताबों के मुस्लिम विद्वानों ने जवाब भी दिए. मौलाना सनाउल्लाह अमृतसरी, लेखक 'हक प्रकाश बजवाब सत्यार्थ प्रकाश' से ११ साल की बहस के बाद आप इस्लाम की सच्चाई को मान कर फिर मुस्लिम हुए और अपना नया नाम गाजी महमूद रखा. अपने ११ साल के आर्यसमाजी अनुभव को अपनी इस नयी पुस्तक 'वेद और स्वामी दयानन्द' में पेश किया है.

 

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Ved -Swami Dayanand -ghazi Mehmud Dharmpal (Ex-Arya pandit) Hindi Book