भगवद्गीता में परिवर्तन किया गया है
This article is also available in English. Link: http://www.islamhinduism.com/responses/quick-reference-guide/246-bhagvad-gita-too-has-been-changed-by-hindu-priests-unbelievable-fact/
गीता हिन्दू धर्म का प्राचीन एवं प्रधान ग्रन्थ है | वर्तमान समय में जो 'गीता' नाम से ग्रन्थ उपलब्ध है वह 'मूल' ग्रन्थ नहीं है | 'मूल गीता' में कुल 745 श्लोक थे | जबकि वर्तमान गीता में कुल 700 श्लोक हैं | इसका प्रमाण महाभारत ग्रन्थ के भीष्म पर्व अध्याय 43, श्लोक 4 में मौजूद है | जैसे
षट्शतानि सविंशानि श्लोकानां प्राह केशवः
अर्जुनं सप्तपंचाशत सप्त षष्ठि च संजयः
धृतराष्ट्र श्लोक मेकं गीतायां मान मुच्यते
अर्थ: गीता में श्री कृष्ण वाक्य (श्लोक संख्या) 620 हैं, अर्जुन वाक्य की संख्या 57 है, संजय वाक्य की संख्या 67, एवं धृतराष्ट्र वाक्य 1 है |
अतः कुल योग = 620+57+67+1=745 हुआ |
वर्तमान गीता में श्री कृष्ण वाक्य 575 हैं, अर्जुन वाक्य 84, संजय वाक्य 40, एवं धृतराष्ट्र वाक्य 1 है |
इस प्रकार कुल योग =575+84+40+1=700 होता है |
नीचे प्रसिद्ध गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित महाभारत की स्केन की गई छवि है

महाभारत की इस जानकारी से हमें गीता में हुए परिवर्तन का स्वभाव पता चलता है | जहां पर कृष्ण वाक्य की संख्या 620 से 575 तक घट गई वहीं अर्जुन वाक्य की संख्या 57 से 84 तक बढ़ गई | इस से सिद्ध होता है कि गीता में दोनों प्रकार के परिवर्तन हुए हैं, अर्थात नए श्लोक मिलाए गए हैं और मूल शल्कों में से कई श्लोक नष्ट कर दिए गए हैं | हम यह सुनिश्चित नहीं कर सकते हैं कि वर्तमान गीता के कोंसे श्लोक असली है और कोन से फर्जी हैं | क्या इस प्रकार की संशोधित पुस्तक कभी एक मनुष्य का मार्ग दर्शन कर सकती है?
सोचिए |


